श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 36

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 2 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच | अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः | अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजितः ||३६||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
अर्जुन
अर्जुन
उवाच
बोले
अथ
अब
केन
किसके द्वारा
प्रयुक्त
प्रेरित होकर
अयम्
यह
पापम्
पाप
चरति
करता है
पूरुष
मनुष्य
अनिच्छन्
न चाहता हुआ
अपि
भी
वार्ष्णेय
हे वार्ष्णेय (कृष्ण)
बलात्
बलपूर्वक
इव
मानो
नियोजित
लगाया गया।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अर्जुन बोले: हे वार्ष्णेय! फिर किसके द्वारा प्रेरित होकर यह मनुष्य पाप करता है, अनिच्छा से भी, मानो बलपूर्वक लगाया गया हो?

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अर्जुन अब एक गूढ़ प्रश्न पूछते हैं – यदि मनुष्य जानता है कि यह पाप है, फिर भी वह पाप क्यों करता है? इसका उत्तर आगे दिया जाएगा। Arjuna now asks a profound question – why does a person commit sin even against their will? The answer follows.

श्लोक का अर्थ / Meaning

अर्जुन पूछते हैं – हे कृष्ण, किसके प्रेरणा से मनुष्य अनिच्छा से भी पाप करता है? Arjuna asks – O Krishna, by what is a person impelled to commit sin, even unwillingly?

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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