मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रीभगवानुवाच | काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः | महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ||३७||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदश्रीभगवान्
भगवान
उवाच
बोले
काम
काम
एष
यह
क्रोध
क्रोध
एष
यह
रजोगुणसमुद्भव
रजोगुण से उत्पन्न
महाशन
महान भक्षक (अतृप्त)
महापाप्मा
महान पापी
विद्धि
जानो
एनम्
इसे
इह
इस संसार में
वैरिणम्
शत्रु।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
श्रीभगवान् बोले: यह काम और यह क्रोध, जो रजोगुण से उत्पन्न हैं, महान भक्षक (अतृप्त) और महापापी हैं। इसे ही इस (संसार) में शत्रु जान।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान उत्तर देते हैं – यह काम और क्रोध ही मनुष्य को पाप की ओर प्रेरित करते हैं। ये रजोगुण से उत्पन्न होते हैं और आत्मा के शत्रु हैं। The Lord answers – it is desire and anger, born of rajas, that impel a person to sin. They are the enemies of the soul.
श्लोक का अर्थ / Meaning
काम और क्रोध, रजोगुण से उत्पन्न, महान भक्षक और पापी हैं – इन्हीं को शत्रु जानो। Desire and anger, born of rajas, are great devourers and sinners – know them as the enemy.