मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
धूमेनाव्रियते वह्निर्यथादर्शो मलेन च | यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम् ||३८||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदधूमेन
धुएँ से
आव्रियते
ढका जाता है
वह्नि
अग्नि
यथा
जैसे
आदर्श
दर्पण
मलेन
मैल से
च
और
यथा
जैसे
उल्बेन
गर्भाशय की झिल्ली से
आवृत
ढका हुआ
गर्भ
गर्भ
तथा
वैसे ही
तेन
उस (काम) से
इदम्
यह (सम्पूर्ण जगत)
आवृतम्
ढका हुआ है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जैसे धुएँ से अग्नि ढकी रहती है, जैसे दर्पण मैल से ढका रहता है, जैसे गर्भ झिल्ली से ढका रहता है, वैसे ही इस (जगत) को उस (काम) ने ढक रखा है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान अब काम की आवरण शक्ति का वर्णन तीन दृष्टान्तों से करते हैं – जैसे धुआँ आग को, मैल दर्पण को, और झिल्ली गर्भ को ढक लेती है, वैसे ही काम ज्ञान को ढक लेता है। The Lord now describes the covering power of desire with three examples – as smoke covers fire, dust a mirror, and a membrane an embryo, so does desire cover knowledge.
श्लोक का अर्थ / Meaning
जैसे धुआँ आग को, मैल दर्पण को, झिल्ली गर्भ को ढकती है, वैसे ही काम ज्ञान को ढक लेता है। As fire is covered by smoke, a mirror by dust, an embryo by the womb, so is knowledge covered by desire.