श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 3 (कर्म योग (Karma Yoga))

अध्याय 3 · श्लोक 5

कर्म योग (Karma Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 43 3 मिनट का पठन 130 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् | कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ||५||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
न
नहीं
हि
निश्चय ही
कश्चित्
कोई भी
क्षणम्
क्षणभर
अपि
भी
जातु
कभी
तिष्ठति
रहता है
अकर्मकृत्
बिना कर्म किए
कार्यते
कराया जाता है
हि
ही
अवशः
विवश
कर्म
कर्म
सर्वः
सब
प्रकृतिजै
प्रकृति से उत्पन्न
गुणै
गुणों द्वारा।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

निश्चय ही कोई भी प्राणी क्षणभर भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता, क्योंकि सभी प्रकृतिजनित गुणों के द्वारा विवश होकर कर्म करने को विवश किए जाते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान यहाँ एक महत्वपूर्ण सत्य बताते हैं: कर्म से बचना असंभव है। शरीर और मन होने पर प्रकृति के गुण (सत्व, रज, तम) निरंतर क्रिया करवाते हैं। इसलिए कर्म-संन्यास का अर्थ कर्म छोड़ना नहीं, बल्कि उनके फल का त्याग है। The Lord reveals an important truth: it is impossible to avoid action. As long as we have a body and mind, the guṇas of nature compel us to act. Thus, renunciation does not mean giving up action, but giving up attachment to results.

श्लोक का अर्थ / Meaning

प्रकृति के गुण सभी को कर्म करने के लिए विवश करते हैं, इसलिए बिना कर्म रहना असम्भव है। The guṇas of nature compel everyone to act; thus remaining actionless is impossible.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 3: कर्म योग (Karma Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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