श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 10

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः | बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ||१०||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
वीतरागभयक्रोधाः
राग, भय और क्रोध से रहित
मन्मयाः
मुझमें तन्मय
माम्
मेरी
उपाश्रिताः
शरण में
बहवः
अनेक
ज्ञानतपसा
ज्ञानरूपी तप से
पूताः
पवित्र हुए
मद्भावम्
मेरे भाव (स्वरूप) को
आगताः
प्राप्त हुए।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

राग, भय और क्रोध से रहित, मुझमें तन्मय, मेरी शरण में रहकर, ज्ञानरूपी तप से पवित्र हुए अनेक लोग मेरे भाव (स्वरूप) को प्राप्त हुए हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

कृष्ण उदाहरण देते हैं कि अनेक भक्त पहले भी इस मार्ग से मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं। शर्तें हैं – राग, भय, क्रोध से मुक्ति, ईश्वर में तन्मयता, और ज्ञानरूपी तप से पवित्रता।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

राग, भय और क्रोध से मुक्त, मुझमें तन्मय, मेरी शरण में रहकर, ज्ञानरूपी तप से पवित्र हुए अनेक लोग मेरे भाव (स्वरूप) को प्राप्त हुए हैं। Freed from attachment, fear, and anger, absorbed in Me, taking refuge in Me, purified by the fire of knowledge, many have attained My Being.

मार्ग की सत्यता / Validity of the Path

यह श्लोक बताता है कि यह मार्ग कोई नया नहीं, बल्कि सिद्ध परम्परा है। अनेक साधक पहले भी इस मार्ग से मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं। This verse validates the path by citing the example of many previous seekers who attained liberation through it.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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