श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 9

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 128 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः | त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ||९||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

18 पद
जन्म
जन्म
कर्म
कर्म
च
और
मे
मेरे
दिव्यम्
दिव्य
एवम्
इस प्रकार
यः
जो
वेत्ति
जानता है
तत्त्वतः
तत्त्व से
त्यक्त्वा
त्यागकर
देहम्
शरीर को
पुनर्जन्म
पुनर्जन्म
न
नहीं
एति
पाता
माम्
मुझको
एति
प्राप्त होता है
सः
वह
अर्जुन
हे अर्जुन।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे अर्जुन! जो मेरे दिव्य जन्म और कर्मों को इस प्रकार तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होता, बल्कि मुझको ही प्राप्त होता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ईश्वर के दिव्य जन्म और कर्मों को यथार्थ रूप से जानने का फल – मोक्ष। जो यह समझ लेता है कि कृष्ण का जन्म और कर्म साधारण नहीं, बल्कि दिव्य हैं, वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे अर्जुन! जो मेरे दिव्य जन्म और कर्मों को इस प्रकार तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होता, बल्कि मुझको ही प्राप्त होता है। One who truly knows My divine birth and actions, O Arjuna, is not born again after leaving the body; he attains Me.

ज्ञान का फल / Fruit of Knowledge

यह श्लोक ईश्वर के दिव्य स्वरूप को जानने के फल को स्पष्ट करता है। यह ज्ञान साधक को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त कर मोक्ष दिलाता है। This verse reveals the liberating power of understanding the divine nature of the Lord's appearance and activities.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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श्लोक 9/42 21% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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