मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् | धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ||८||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
8 पदपरित्राणाय
रक्षा के लिए
साधूनाम्
साधुओं (सज्जनों) की
विनाशाय
विनाश के लिए
च
और
दुष्कृताम्
दुष्कर्मियों (दुष्टों) का
धर्मसंस्थापनार्थाय
धर्म की स्थापना के लिए
सम्भवामि
प्रकट होता हूँ
युगे युगे
युग-युग में।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
साधुओं (सज्जनों) की रक्षा के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए, और धर्म की स्थापना के लिए, मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक पिछले श्लोक को विस्तार से समझाता है। अवतार के तीन उद्देश्य हैं – साधुओं की रक्षा, दुष्टों का विनाश, और धर्म की स्थापना। युगे-युगे का अर्थ है कि यह प्रक्रिया निरन्तर चलती रहती है, केवल एक बार नहीं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
साधुओं की रक्षा के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए, और धर्म की स्थापना के लिए, मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ। For the protection of the good, for the destruction of the wicked, and for the establishment of righteousness, I am born in every age.
अवतार के कार्य / Functions of Incarnation
यह श्लोक अवतार के तीन प्रमुख कार्यों को रेखांकित करता है। ईश्वर का प्रकट होना केवल एक घटना नहीं, बल्कि संतुलन स्थापित करने की एक सतत प्रक्रिया है। This verse outlines the threefold purpose of divine incarnation, which is an ongoing process to maintain cosmic balance.