श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 7

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 126 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत | अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ||७||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
यदा यदा
जब-जब
हि
निश्चय ही
धर्मस्य
धर्म की
ग्लानिः
हानि
भवति
होती है
भारत
हे भारत
अभ्युत्थानम्
वृद्धि
अधर्मस्य
अधर्म की
तदा
तब
आत्मानम्
अपने को
सृजामि
प्रकट करता हूँ
अहम्
मैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक है जो अवतार के उद्देश्य को स्पष्ट करता है। ईश्वर के अवतरण का समय संकट का समय होता है – जब धर्म दबने लगता है और अधर्म बढ़ने लगता है। यह ईश्वर की लीला का उद्देश्य बताता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ। Whenever and wherever there is a decline in righteousness and a rise in unrighteousness, O Arjuna, I manifest Myself.

अवतार का उद्देश्य / Purpose of Incarnation

यह श्लोक अवतारवाद का मूल सिद्धांत है। ईश्वर संसार की रक्षा के लिए, धर्म की स्थापना के लिए समय-समय पर अवतरित होते हैं। This verse is the foundational principle of incarnation – God descends to establish righteousness and protect the world.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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श्लोक 7/42 17% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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