मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः | तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ||१३||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
11 पदचातुर्वर्ण्यम्
चार वर्णों की व्यवस्था
मया
मेरे द्वारा
सृष्टम्
रची गई
गुणकर्मविभागशः
गुणों और कर्मों के विभाग से
तस्य
उसका
कर्तारम्
कर्ता
अपि
भी
माम्
मुझको
विद्धि
जानो
अकर्तारम्
अकर्ता
अव्ययम्
अविनाशी।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
गुणों और कर्मों के विभाग के अनुसार चार वर्णों की रचना मेरे द्वारा की गई है। उस (व्यवस्था) का कर्ता होते हुए भी मुझे अकर्ता और अविनाशी जानो।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
कृष्ण वर्णव्यवस्था के आधार को स्पष्ट करते हैं। यह व्यवस्था जन्म पर आधारित नहीं, बल्कि गुण (प्रकृति) और कर्म (कार्य) पर आधारित है। और महत्वपूर्ण बात – ईश्वर इस व्यवस्था का निर्माता होते हुए भी उससे लिप्त नहीं होते; वे अकर्ता और अविनाशी हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
गुणों और कर्मों के विभाग के अनुसार चार वर्णों की रचना मेरे द्वारा की गई है। उस व्यवस्था का कर्ता होते हुए भी मुझे अकर्ता और अविनाशी जानो। The fourfold caste has been created by Me according to the differentiation of Guna and Karma; though I am the author of it, know Me as non-doer and immutable.
वर्ण का आधार / Basis of Varna
यह श्लोक स्पष्ट करता है कि वर्ण जन्म से नहीं, बल्कि व्यक्ति के गुण (स्वभाव) और कर्म (कार्य) से निर्धारित होता है। यह एक कार्यात्मक विभाजन है, जन्मगत भेदभाव नहीं। This verse clarifies that the fourfold division is based on one's qualities and actions, not birth.