श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 15

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 121 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः | कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ||१५||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
एवम्
इस प्रकार
ज्ञात्वा
जानकर
कृतम्
किया गया
कर्म
कर्म
पूर्वैः
पूर्वजों द्वारा
अपि
भी
मुमुक्षुभिः
मुमुक्षुओं (मोक्ष की इच्छा रखने वालों) द्वारा
कुरु
कर
कर्म
कर्म
एव
ही
तस्मात्
इसलिए
त्वम्
तू
पूर्वैः
पूर्वजों द्वारा
पूर्वतरम्
पहले
कृतम्
किया गया।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इस प्रकार जानकर, पूर्वज मुमुक्षुओं (मोक्ष की इच्छा रखने वालों) ने भी कर्म किया है। इसलिए तू भी वैसा कर्म कर, जैसा पूर्वजों ने पहले किया था।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

कृष्ण ऐतिहासिक उदाहरण देते हैं। जिन पूर्वजों ने मोक्ष की इच्छा रखी, उन्होंने भी यही मार्ग अपनाया – फलासक्ति रहित होकर कर्म किया। इसलिए अर्जुन को भी उसी मार्ग पर चलना चाहिए।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

इस प्रकार जानकर, पूर्वज मुमुक्षुओं ने भी कर्म किया है। इसलिए तू भी वैसा कर्म कर, जैसा पूर्वजों ने पहले किया था। Having known this, the ancient seekers of freedom also performed action; therefore, do you also perform action, as the ancients did in days of yore.

परम्परा का महत्व / Importance of Tradition

यह श्लोक सिद्ध परम्परा के अनुसरण का महत्व बताता है। अर्जुन कोई नया मार्ग नहीं बना रहे, बल्कि उन महान पूर्वजों के पदचिन्हों पर चल रहे हैं जिन्होंने इसी मार्ग से मोक्ष पाया। This verse emphasizes the importance of following the path trodden by liberated souls of the past.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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श्लोक 15/42 36% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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