श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 17

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 126 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः | अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः ||१७||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
कर्मणः
कर्म के स्वरूप को
हि
निश्चय ही
अपि
भी
बोद्धव्यम्
जानना चाहिए
बोद्धव्यम्
जानना चाहिए
च
और
विकर्मणः
विकर्म (निषिद्ध कर्म) को
अकर्मणः
अकर्म को
च
और
बोद्धव्यम्
जानना चाहिए
गहना
गहन है
कर्मणः
कर्म की
गतिः
गति।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

निश्चय ही कर्म के स्वरूप को जानना चाहिए, और विकर्म (निषिद्ध कर्म) को जानना चाहिए, और अकर्म को भी जानना चाहिए। कर्म की गति गहन है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

कर्म के तीन भेद – कर्म (शास्त्र-विहित), विकर्म (निषिद्ध), और अकर्म (क्रियाशून्यता)। इन तीनों के स्वरूप को समझना आवश्यक है, क्योंकि कर्म का मार्ग अत्यन्त गूढ़ है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

निश्चय ही कर्म के स्वरूप को जानना चाहिए, और विकर्म (निषिद्ध कर्म) को जानना चाहिए, और अकर्म को भी जानना चाहिए। कर्म की गति गहन है। The true nature of action should be known, as well as that of forbidden action, and of inaction; the nature of action is hard to understand.

त्रिविध कर्म / Threefold Action

यह श्लोक कर्म के तीन पहलुओं – विहित कर्म, निषिद्ध कर्म, और अकर्म – के ज्ञान की आवश्यकता बताता है। इन तीनों को समझे बिना कर्मयोग का रहस्य नहीं समझा जा सकता। This verse highlights the need to understand the threefold nature of action to grasp the mystery of karma.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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