श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 19

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 131 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः | ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ||१९||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
यस्य
जिसके
सर्वे
सब
समारम्भाः
आरम्भ (प्रयास)
कामसङ्कल्पवर्जिताः
कामना और संकल्प से रहित
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्
ज्ञानरूपी अग्नि से दग्ध (जले) कर्म वाले
तम्
उसे
आहुः
कहते हैं
पण्डितम्
पण्डित
बुधाः
ज्ञानी लोग।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जिसके सब आरम्भ (प्रयास) कामना और संकल्प से रहित हैं, और जिसके कर्म ज्ञानरूपी अग्नि से दग्ध (जले) हो गए हैं, उसे ज्ञानी लोग पण्डित (ज्ञानी) कहते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ज्ञानी की पहचान – उसके सभी प्रयास कामना और संकल्प से रहित होते हैं। ज्ञानाग्निदग्धकर्म का अर्थ है कि उसके कर्म ज्ञान की अग्नि में जलकर भस्म हो गए हैं, अर्थात उनका कोई बंधनकारी फल नहीं बचता।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिसके सब आरम्भ (प्रयास) कामना और संकल्प से रहित हैं, और जिसके कर्म ज्ञानरूपी अग्नि से दग्ध (जले) हो गए हैं, उसे ज्ञानी लोग पण्डित (ज्ञानी) कहते हैं। He whose undertakings are all devoid of desires and selfish purposes, and whose actions have been burned by the fire of knowledge, the wise call him a sage.

ज्ञान की अग्नि / Fire of Knowledge

यह श्लोक ज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाता है। जैसे अग्नि ईंधन को जलाकर भस्म कर देती है, वैसे ही ज्ञान कर्मों के बंधनकारी फलों को नष्ट कर देता है। This verse illustrates the transformative power of knowledge, which burns up the binding effects of actions.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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