श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 21

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 116 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्तसर्वपरिग्रहः | शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् ||२१||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
निराशीः
आशारहित
यतचित्तात्मा
चित्त और आत्मा (मन) को वश में किए हुए
त्यक्तसर्वपरिग्रहः
सब प्रकार के परिग्रह (संग्रह) का त्याग किए हुए
शारीरम्
शारीरिक
केवलम्
केवल
कर्म
कर्म
कुर्वन्
करता हुआ
न
नहीं
आप्नोति
प्राप्त करता
किल्बिषम्
पाप (बन्धन)।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

आशारहित, चित्त और आत्मा (मन) को वश में किए हुए, सब प्रकार के परिग्रह (संग्रह) का त्याग करके केवल शारीरिक कर्म करता हुआ भी वह पाप (बन्धन) को प्राप्त नहीं होता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ज्ञानी के कर्म केवल शारीरिक स्तर पर होते हैं – देह से किए जाते हैं, पर मन से नहीं। वह आशारहित, मनोनिग्रही और संग्रह-त्यागी होता है। ऐसा व्यक्ति कर्म करते हुए भी बन्धन में नहीं पड़ता।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

आशारहित, चित्त और आत्मा (मन) को वश में किए हुए, सब प्रकार के परिग्रह का त्याग करके केवल शारीरिक कर्म करता हुआ भी वह पाप (बन्धन) को प्राप्त नहीं होता। Without hope, controlling the mind and the self, having abandoned all covetousness, and performing only bodily actions, one incurs no sin.

यांत्रिक कर्म / Mechanical Action

यह श्लोक बताता है कि ज्ञानी के कर्म केवल शारीरिक स्तर पर होते हैं, मानो वह एक यंत्र मात्र हो। उसकी आत्मा उन कर्मों में लिप्त नहीं होती। This verse indicates that the actions of the wise are merely physical, with no mental involvement or egoistic identification.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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