श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 22

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः | समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते ||२२||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
यदृच्छालाभसन्तुष्टः
यदृच्छा (बिना प्रयास) से प्राप्त लाभ में सन्तुष्ट
द्वन्द्वातीतः
द्वन्द्वों से रहित
विमत्सरः
मत्सर (ईर्ष्या) से रहित
समः
समान
सिद्धौ
सफलता में
असिद्धौ
असफलता में
च
और
कृत्वा
करके
अपि
भी
न
नहीं
निबध्यते
बंधता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

बिना प्रयास (अपने आप) प्राप्त हुए लाभ में सन्तुष्ट, द्वन्द्वों से अतीत, ईर्ष्या से रहित, सफलता और असफलता में समान – वह कर्म करके भी नहीं बंधता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ज्ञानी के और लक्षण – वह जो भी बिना माँगे मिल जाता है, उसी में संतुष्ट रहता है। वह द्वन्द्वों (सुख-दुःख, सर्दी-गर्मी आदि) से परे है। उसमें ईर्ष्या नहीं है। वह सफलता-असफलता में समान रहता है। ऐसा व्यक्ति कर्म करते हुए भी बन्धनमुक्त रहता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

बिना प्रयास प्राप्त हुए लाभ में सन्तुष्ट, द्वन्द्वों से अतीत, ईर्ष्या से रहित, सफलता और असफलता में समान – वह कर्म करके भी नहीं बंधता। Content with what comes without effort, free from the pairs of opposites and envy, even-minded in success and failure, he acts yet is not bound.

संतोष और समत्व / Contentment and Equanimity

यह श्लोक ज्ञानी के जीवन-दर्शन को प्रस्तुत करता है – संतोष, समत्व, और सफलता-असफलता में समान भाव। यही कर्मबन्धन से मुक्ति का मार्ग है। This verse presents the life-philosophy of the wise – contentment, equanimity, and indifference to success and failure.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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