श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 23

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः | यज्ञायाचरतः कर्म समग्रं प्रविलीयते ||२३||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

7 पद
गतसङ्गस्य
आसक्ति रहित
मुक्तस्य
मुक्त
ज्ञानावस्थितचेतसः
ज्ञान में स्थित चित्त वाले
यज्ञायाचरतः
यज्ञ के लिए आचरण करते हुए
कर्म
कर्म
समग्रम्
सम्पूर्ण
प्रविलीयते
विलीन हो जाता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

आसक्ति से रहित, मुक्त, ज्ञान में स्थित चित्त वाला, और यज्ञ के लिए आचरण करता हुआ – ऐसे पुरुष का सम्पूर्ण कर्म विलीन हो जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ज्ञानी के चार गुण – आसक्तिरहित, मुक्त, ज्ञान में स्थित चित्त, और यज्ञभाव से कर्म करने वाला। ऐसे व्यक्ति के सभी कर्म विलीन हो जाते हैं, अर्थात उनका कोई बंधनकारी फल नहीं रहता।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

आसक्ति से रहित, मुक्त, ज्ञान में स्थित चित्त वाला, और यज्ञ के लिए आचरण करता हुआ – ऐसे पुरुष का सम्पूर्ण कर्म विलीन हो जाता है। To one who is devoid of attachment, liberated, whose mind is established in knowledge, and who works for the sake of sacrifice, the whole action is dissolved.

कर्म का अंत / End of Karma

यह श्लोक बताता है कि किस प्रकार के व्यक्ति के कर्म समाप्त हो जाते हैं (अर्थात बंधनकारी फल नहीं देते)। यह चार गुण – आसक्तिरहितता, मुक्ति, ज्ञान-निष्ठा, और यज्ञभाव – कर्मबन्धन से मुक्ति के मार्ग हैं। This verse describes the four qualities that lead to the dissolution of karmic bonds.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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