श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 27

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वाणीन्द्रियकर्माणि प्राणकर्माणि चापरे | आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते ||२७||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

8 पद
सर्वाणि
सब
इन्द्रियकर्माणि
इन्द्रियों के कर्मों को
प्राणकर्माणि
प्राणों के कर्मों को
च
और
अपरे
अन्य
आत्मसंयमयोगाग्नौ
आत्म-संयमरूपी योग की अग्नि में
जुह्वति
हवन करते हैं
ज्ञानदीपिते
ज्ञान से प्रदीप्त।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अन्य (योगी) सब इन्द्रियों के कर्मों और प्राणों के कर्मों को, ज्ञान से प्रदीप्त आत्म-संयमरूपी योग की अग्नि में हवन करते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यहाँ साधना का उच्चतम स्तर बताया गया है – समस्त इन्द्रिय-व्यापार और प्राण-व्यापार को आत्म-संयमरूपी योग की अग्नि में आहुति दे देना। यह अग्नि ज्ञान से प्रज्वलित होती है, अर्थात यह कोई यांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ज्ञानपूर्वक की गई साधना है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अन्य योगी सब इन्द्रियों के कर्मों और प्राणों के कर्मों को, ज्ञान से प्रदीप्त आत्म-संयमरूपी योग की अग्नि में हवन करते हैं। Others again sacrifice all the functions of the senses and those of the breath in the fire of the Yoga of self-restraint, kindled by knowledge.

सम्पूर्ण समर्पण / Total Surrender

यह श्लोक साधना के चरम बिन्दु को दर्शाता है – जहाँ इन्द्रियों और प्राणों की समस्त क्रियाओं को ज्ञानपूर्वक आत्म-संयम की अग्नि में समर्पित कर दिया जाता है। यह सम्पूर्ण आत्म-समर्पण की स्थिति है। This verse depicts the ultimate point of spiritual practice – offering all sensory and vital functions in the fire of self-restraint.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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