मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः | भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ||३||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
19 पदसः
वही
एव
निश्चय ही
अयम्
यह
मया
मेरे द्वारा
ते
तुमसे
अद्य
आज
योगः
योग
प्रोक्तः
कहा गया
पुरातनः
प्राचीन
भक्तः
भक्त
असि
हो
मे
मेरा
सखा
मित्र
च
और
इति
इसलिए
रहस्यम्
रहस्य
हि
निश्चय ही
एतत्
यह
उत्तमम्
उत्तम।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
वही यह प्राचीन योग आज मेरे द्वारा तुमसे कहा गया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो। यह उत्तम रहस्य है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
कृष्ण अर्जुन को विशेषाधिकार बताते हैं कि वही प्राचीन योग आज उन्हें दिया जा रहा है। इसका कारण है – अर्जुन उनके भक्त और मित्र हैं। यहाँ भक्ति और मित्रता दोनों को ज्ञान प्राप्ति के लिए आधार बताया गया है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
वही प्राचीन योग आज मेरे द्वारा तुमसे कहा गया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो। यह परम रहस्य है। That same ancient yoga has been today taught to you by Me, for you are My devotee and My friend; it is the supreme secret.
पात्रता / Eligibility
यह श्लोक बताता है कि गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान केवल उन्हीं को दिया जाता है जो भक्त और विश्वासपात्र हों। अर्जुन की पात्रता ही उन्हें यह ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार देती है। This verse emphasizes that spiritual secrets are revealed only to those who are devoted and trustworthy.