श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 30

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 108 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वेऽप्येते यज्ञविदो यज्ञक्षपितकल्मषाः | यज्ञशिष्टामृतभुजो यान्ति ब्रह्म सनातनम् ||३०||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
सर्वे
सभी
अपि
भी
एते
ये
यज्ञविदः
यज्ञ के ज्ञाता
यज्ञक्षपितकल्मषाः
यज्ञ द्वारा क्षय किए हुए पाप वाले
यज्ञशिष्टामृतभुजः
यज्ञ से बचे हुए अमृत को भोगने वाले
यान्ति
जाते हैं
ब्रह्म
ब्रह्म
सनातनम्
सनातन।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

ये सभी यज्ञ के ज्ञाता हैं, यज्ञ द्वारा क्षय किए हुए पाप वाले हैं, और यज्ञ से बचे हुए अमृत को भोगने वाले हैं – वे सनातन ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

सभी प्रकार के यज्ञ करने वालों का लक्ष्य एक ही है – ब्रह्म की प्राप्ति। वे यज्ञ के ज्ञाता हैं, यज्ञ से उनके पाप नष्ट हो जाते हैं, और वे यज्ञ के शेष (प्रसाद) का भोग करते हुए अंततः सनातन ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

ये सभी यज्ञ के ज्ञाता हैं, यज्ञ द्वारा क्षय किए हुए पाप वाले हैं, और यज्ञ से बचे हुए अमृत को भोगने वाले हैं – वे सनातन ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। All these are knowers of sacrifice, whose sins are destroyed through sacrifice. They, who enjoy the nectar of the remnants of sacrifice, go to the eternal Brahman.

एक लक्ष्य / One Goal

यह श्लोक बताता है कि चाहे यज्ञ का स्वरूप कोई भी हो – बाह्य या आन्तरिक – सभी का लक्ष्य एक ही है – ब्रह्म की प्राप्ति। यह विविधता में एकता का सिद्धांत है। This verse establishes the unity underlying the diversity of spiritual paths – all lead to the same goal of Brahman.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
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श्लोक 30/42 71% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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