मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया । उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥ ३४ ॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदतत्
उस (ज्ञान) को
विद्धि
जानो
प्रणिपातेन
प्रणिपात (समर्पण) से
परिप्रश्नेन
परिप्रश्न (विनीत प्रश्न) से
सेवया
सेवा से
उपदेक्ष्यन्ति
उपदेश देंगे
ते
तुझे
ज्ञानम्
ज्ञान
ज्ञानिनः
ज्ञानी
तत्त्वदर्शिनः
तत्त्व के दर्शी (साक्षात्कारी)।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
उस (ज्ञान) को तू प्रणिपात (समर्पण), परिप्रश्न (विनीत प्रश्न) और सेवा द्वारा जान। तत्त्व के साक्षात्कारी ज्ञानीजन तुझे उस ज्ञान का उपदेश देंगे।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक गुरु-शिष्य परम्परा का आधार है। ज्ञान प्राप्त करने के तीन साधन बताए गए हैं—प्रणिपात (गुरु के चरणों में समर्पण), परिप्रश्न (विनीत भाव से प्रश्न करना), और सेवा (गुरु की सेवा)। ऐसे शिष्य को तत्त्वदर्शी गुरु सच्चा ज्ञान प्रदान करते हैं। यहाँ बल इस बात पर है कि ज्ञान केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि साक्षात् गुरु के सान्निध्य से प्राप्त होता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
उस (ज्ञान) को तू प्रणिपात (समर्पण), परिप्रश्न (विनीत प्रश्न) और सेवा द्वारा जान। तत्त्व के साक्षात्कारी ज्ञानीजन तुझे उस ज्ञान का उपदेश देंगे। Know that by prostrating yourself at the feet of the wise, by questioning them, and by serving them, the wise who have realized the Truth will instruct you in that knowledge.
व्याख्या / Explanation
यह श्लोक गुरु-शिष्य सम्बन्ध की महत्ता को रेखांकित करता है। ज्ञान प्राप्ति के लिए तीन शर्तें हैं: (1) प्रणिपात—गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और विनम्रता, (2) परिप्रश्न—जिज्ञासा के साथ स्पष्टीकरण माँगना, और (3) सेवा—गुरु की सेवा करके उनकी कृपा पात्र बनना। ऐसे शिष्य को ही गुरु तत्त्वज्ञान का उपदेश देते हैं। ज्ञान केवल बौद्धिक नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और गुरु-कृपा से प्राप्त होता है।