श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 36

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 106 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः । सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि ॥ ३६ ॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
अपि
यद्यपि
चेत्
यदि
असि
तुम हो
पापेभ्यः
पापियों में
सर्वेभ्यः
सबसे
पापकृत्तमः
अधिक पाप करने वाला
सर्वम्
सब
ज्ञानप्लवेन
ज्ञानरूपी नौका द्वारा
एव
ही
वृजिनम्
पाप-समुद्र को
सन्तरिष्यसि
पार कर जाओगे।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

यदि तू सब पापियों से भी अधिक पाप करने वाला है, तो भी ज्ञानरूपी नौका द्वारा तू सम्पूर्ण पाप-समुद्र को पार कर जाएगा।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक ज्ञान की महिमा का गान करता है। ज्ञान की शक्ति इतनी प्रबल है कि वह सबसे बड़े पापी को भी पापों के समुद्र से पार उतार सकती है। यहाँ ज्ञानप्लव (ज्ञानरूपी नौका) का प्रयोग दर्शाता है कि जैसे नौका बिना डूबे पानी को पार करा देती है, वैसे ही ज्ञान बिना लिप्त हुए पापों के प्रभाव से मुक्त कर देता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

यदि तू सब पापियों से भी अधिक पाप करने वाला है, तो भी ज्ञानरूपी नौका द्वारा तू सम्पूर्ण पाप-समुद्र को पार कर जाएगा। Even if you are the most sinful of all sinners, you shall cross over all sin by the raft of knowledge alone.

व्याख्या / Explanation

यह श्लोक आश्वासन देता है कि ज्ञान की शक्ति अपरिमित है। चाहे व्यक्ति ने कितने ही भयानक पाप किए हों, सच्चा आत्मज्ञान (या ब्रह्मज्ञान) उसे उन सबके प्रभाव से मुक्त कर देता है। ज्ञान, जैसे अग्नि ईंधन को जला देती है, वैसे ही पापों के संस्कारों को नष्ट कर देता है। इसलिए ज्ञान प्राप्ति का प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 36 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 36/42 86% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!