श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 4 (ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga))

अध्याय 4 · श्लोक 39

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ॥ ३९ ॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
श्रद्धावान्
श्रद्धालु
लभते
प्राप्त करता है
ज्ञानम्
ज्ञान
तत्परः
उसमें तत्पर
संयतेन्द्रियः
संयमित इन्द्रियों वाला
ज्ञानम्
ज्ञान
लब्ध्वा
प्राप्त करके
पराम्
परम
शान्तिम्
शान्ति
अचिरेण
शीघ्र
अधिगच्छति
प्राप्त होता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

श्रद्धालु, उसमें (ज्ञान में) तत्पर और संयमित इन्द्रियों वाला पुरुष ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान प्राप्त करके वह शीघ्र ही परम शान्ति को प्राप्त हो जाता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ज्ञान प्राप्ति के लिए तीन शर्तें हैं—श्रद्धा (विश्वास), तत्परता (निष्ठा), और संयतेन्द्रियता (इन्द्रिय-निग्रह)। श्रद्धा के बिना ज्ञान टिकाऊ नहीं होता। तत्परता के बिना प्रयास निरन्तर नहीं रहता। इन्द्रिय-संयम के बिना मन भटकता रहता है। इन तीनों से युक्त साधक ज्ञान प्राप्त करता है और फिर शीघ्र ही परम शान्ति (मोक्ष) को प्राप्त होता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

श्रद्धालु, उसमें (ज्ञान में) तत्पर और संयमित इन्द्रियों वाला पुरुष ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान प्राप्त करके वह शीघ्र ही परम शान्ति को प्राप्त हो जाता है। A man of faith, devoted to it, and having subdued his senses, attains knowledge. Having attained knowledge, he soon attains supreme peace.

व्याख्या / Explanation

यह श्लोक साधना के तीन आवश्यक तत्व बताता है। श्रद्धा—गुरु और शास्त्रों पर अटूट विश्वास। तत्परता—निरन्तर अभ्यास और लगन। संयम—इन्द्रियों पर नियंत्रण, क्योंकि इन्द्रियाँ ही ज्ञान के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा हैं। इन तीनों गुणों से युक्त साधक को ज्ञान अवश्य प्राप्त होता है, और ज्ञान मिलते ही वह शीघ्र ही परम शान्ति (मोक्ष) का अधिकारी बन जाता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 39 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 39/42 93% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!