श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 1

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 3 मिनट का पठन 128 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥ १॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
श्रीभगवान् उवाच
भगवान् ने कहा
मयि
मुझमें
आसक्तमनाः
आसक्त मन वाला
पार्थ
हे पार्थ
योगम्
योग का
युञ्जन्
अभ्यास करता हुआ
मदाश्रयः
मेरे आश्रय में रहकर
असंशयम्
संशयरहित
समग्रम्
सम्पूर्ण
माम्
मुझे
यथा
जैसे
ज्ञास्यसि
तू जानेगा
तत्
उसे
शृणु
सुन।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

श्रीभगवान् बोले: हे पार्थ! मुझमें आसक्त मनवाला, योग का अभ्यास करता हुआ तथा मेरे आश्रय में रहकर तुम मुझे संपूर्णतया और संशयरहित होकर कैसे जानोगे, उसे सुनो।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक अध्याय ७ का प्रारम्भ है, जिसमें कृष्ण अर्जुन को आश्वासन देते हैं कि वे उन्हें पूर्ण रूप से जानने का उपाय बताएँगे। मुख्य शर्त है मन को कृष्ण में लगाना और उनकी शरण में रहना।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: हे अर्जुन! अपने मन को मुझमें आसक्त करो, योग (समाधि) का अभ्यास करो और मेरी शरण में रहो। तब तुम निःसंदेह मुझे सम्पूर्ण रूप से जान सकोगे – उसे सुनो।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ज्ञान की प्राप्ति के लिए एकाग्र मन, अभ्यास, और ईश्वर के प्रति समर्पण आवश्यक है। बिना श्रद्धा और समर्पण के परम तत्त्व को जानना असंभव है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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