मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ज्ञानं ते ऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः । यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते ॥ २॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदज्ञानम्
ज्ञान
ते
तुझे
अहम्
मैं
सविज्ञानम्
विज्ञान सहित
इदम्
यह
वक्ष्यामि
कहूँगा
अशेषतः
सम्पूर्ण रूप से
यत्
जिसे
ज्ञात्वा
जानकर
न
नहीं
इह
इस लोक में
भूयः
फिर
अन्यत्
अन्य कुछ
ज्ञातव्यम्
जानने योग्य
अवशिष्यते
शेष रहता है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
मैं तुझे इस ज्ञान और विज्ञान सहित सम्पूर्ण रूप से कहूँगा, जिसे जानने के बाद इस लोक में फिर कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रहता।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
कृष्ण अर्जुन को वह ज्ञान देने का वचन देते हैं जो परिपूर्ण है। ज्ञान (सैद्धांतिक ज्ञान) और विज्ञान (आध्यात्मिक अनुभव) दोनों का समावेश है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कहते हैं: मैं तुझे इस ज्ञान (सिद्धांत) और विज्ञान (अनुभव) सहित सम्पूर्ण रूप से बताऊँगा। जिसे जान लेने के बाद इस संसार में और कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रह जाता।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
पूर्ण ज्ञान वह है जो न केवल बौद्धिक स्तर पर हो, बल्कि जीवन में उतरकर अनुभव भी किया जाए। ईश्वर को जान लेना ही सब कुछ जान लेना है।