श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 7 (ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga))

अध्याय 7 · श्लोक 2

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 30 3 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ज्ञानं ते ऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः । यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते ॥ २॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
ज्ञानम्
ज्ञान
ते
तुझे
अहम्
मैं
सविज्ञानम्
विज्ञान सहित
इदम्
यह
वक्ष्यामि
कहूँगा
अशेषतः
सम्पूर्ण रूप से
यत्
जिसे
ज्ञात्वा
जानकर
न
नहीं
इह
इस लोक में
भूयः
फिर
अन्यत्
अन्य कुछ
ज्ञातव्यम्
जानने योग्य
अवशिष्यते
शेष रहता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

मैं तुझे इस ज्ञान और विज्ञान सहित सम्पूर्ण रूप से कहूँगा, जिसे जानने के बाद इस लोक में फिर कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रहता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

कृष्ण अर्जुन को वह ज्ञान देने का वचन देते हैं जो परिपूर्ण है। ज्ञान (सैद्धांतिक ज्ञान) और विज्ञान (आध्यात्मिक अनुभव) दोनों का समावेश है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं: मैं तुझे इस ज्ञान (सिद्धांत) और विज्ञान (अनुभव) सहित सम्पूर्ण रूप से बताऊँगा। जिसे जान लेने के बाद इस संसार में और कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रह जाता।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

पूर्ण ज्ञान वह है जो न केवल बौद्धिक स्तर पर हो, बल्कि जीवन में उतरकर अनुभव भी किया जाए। ईश्वर को जान लेना ही सब कुछ जान लेना है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 2 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 2/30 7% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!