मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये । यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः ॥ ३॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदमनुष्याणाम्
मनुष्यों में
सहस्रेषु
हजारों में
कश्चित्
कोई एक
यतति
प्रयत्न करता है
सिद्धये
सिद्धि के लिए
यतताम्
प्रयत्न करते हुए
अपि
भी
सिद्धानाम्
सिद्धों में
कश्चित्
कोई एक
माम्
मुझे
वेत्ति
जानता है
तत्त्वतः
तत्त्व से।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हजारों मनुष्यों में से कोई एक सिद्धि (पूर्णता) के लिए प्रयत्न करता है; और उन प्रयत्नशील सिद्धों में से भी कोई एक ही मुझे तत्त्व से जानता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक आत्मज्ञान और ईश्वर-प्राप्ति की दुर्लभता को दर्शाता है। लाखों में एक को ही परम सत्य का बोध होता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हजारों मनुष्यों में से कोई एक सिद्धि (मोक्ष) के लिए प्रयास करता है। और उन सिद्ध पुरुषों में से भी कोई एक ही मुझे यथार्थ रूप में जान पाता है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
आध्यात्मिक पथ पर चलना और परम सत्य को प्राप्त करना अत्यंत कठिन है। इसके लिए अनेक जन्मों का संचित पुण्य और गुरु की कृपा आवश्यक है।