Kabir Das Ke Dohe

ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम लिरिक्स Hari Tero Ajab Niralo Kaam Lyrics in Hindi) - Kabir Bhajan - Bhaktilok

417 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

कबीर की कृपा से हरि का अद्भुत काम

इस भजन के माध्यम से भक्त भगवान हरि की अद्भुतता और लीलाओं का गुणगान करते हैं।

ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम अजब नीरालो काम सांवरिया तेरो अजब नीरालो काम सुख में सिमरन कोई नहीं करता दुःख में रटे तमाम ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम सांवरिया तेरो अजब नीरालो काम। माया धन की बाँध पोटली करता गरभ गुमान आ माया अंत काम ना आवे नही जाणे अज्ञान ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम सांवरिया तेरो अजब नीरालो काम। मालीक मेरा सब कुछ तेरा क्यो भूला इन्सान तेरा तुमसे पाकर के नरबण बैठा धनवान ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम सांवरिया तेरो अजब नीरालो काम। नर तन चोला पाकर भोळा रटयो नहीं भगवान क्या करता क्या कर दे मालीक नहीं समझयो तू अज्ञान ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम सांवरिया तेरो अजब नीरालो काम। इक दिन माटी मे मिल जावे हाड माँस और चाम झूठी काय झूठी माया है सांचो तेरो नाम ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम सांवरिया तेरो अजब नीरालो काम। तू ही वाहेगुरु तू ही अल्लाह तू ही ईश्वर राम कहे कबीर बुला ले मैं तेरे चरणा में करूँ विश्राम हरी तेरा अजब निराला काम आलिक तेरा अजब निराला काम। ओ हरी तेरो अजब नीरालो काम सांवरिया तेरो अजब नीरालो काम।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान हरि के अद्भुत और निराले कामों का गुणगान करना है। भजन की पंक्तियाँ हमें यह संदेश देती हैं कि सुख में कोई भी भगवान का स्मरण नहीं करता, जबकि दुःख में सभी उसे याद करने लगते हैं। यहाँ 'सुख में सिमरन कोई नहीं करता, दुःख में रटे तमाम' के द्वारा मनुष्य की स्वार्थी प्रवृत्तियों को उजागर किया गया है। कबीरदास जी हमें यह बताते हैं कि हमें अपनी संपत्तियों और माया में फँसकर अपने असली गुरु और ईश्वर को नहीं भूलना चाहिए। यह भजन हमें यह सिखाता है कि हम हमेशा भगवान को अपने ह्रदय में बसा कर रखें, क्योंकि नश्वर दुनिया की चीजें केवल अस्थायी हैं।

इस भजन में मानवता की नैतिकता और चेतना को जागृत करने की कोशिश की गई है। 'मालीक मेरा सब कुछ तेरा' पंक्ति बताती है कि हम सब कुछ ईश्वर के ही हैं, लेकिन हम इसे भुला देते हैं। कबीर जी एक गहरी सच्चाई उजागर करते हैं कि जब तक हम अपनी आत्मा की सही पहचान नहीं करते, तब तक हम माया में घिरे रहेंगे। यह भजन माया के हानिकारक प्रभाव को समझने का अवसर देता है। 'एक दिन माटी में मिल जावे, हाड माँस और चाम' का अर्थ है कि हम इस जगत में आए हैं केवल कुछ समय के लिए, और अंततः हमें अपनी आत्मा की यात्रा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

कबीर की भक्ति मार्ग संकेत करती है कि प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान की आराधना करनी चाहिए। 'तू ही वाहेगुरु तू ही अल्लाह, तू ही ईश्वर राम' पंक्ति में भगवान के सबूतरूप को दर्शाया गया है। यह भजन सभी धर्मों के एकत्व का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि भगवान एक है, चाहे उसे किसी भी नाम से पूजा जाए। कबीर दास के सिद्धांतों के अनुसार, भगवान के प्रति भक्ति और प्रेम का मार्ग ही सर्वोपरि है, जो हमें spiritual enlightenment की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन कबीरदास जी के अद्वितीय दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो भारतीय संस्कृति में गहराई से निहित है। कबीर जी ने अपने उपदेशों में सामाजिक और धार्मिक उन्मूलन की बात की है। उनके अनुसार, माया और भौतिकता के चक्र में फँसने की बजाय, भक्त को आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होना चाहिए। 'सांचो तेरो नाम' का कंसेप्ट भगवान नाम की वास्तविकता को चिंतित करता है, जिसका अनुसरण हमें हमारे जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद करता है। कबीर जी की कविता का यह अंश दर्शाता है कि सच्चा परमात्मा हर जगह विद्यमान है और हमें सराहना चाहिए उसकी अद्भुत लीलाओं का।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतोष, और आध्यात्मिक जागरूकता का विकास होता है। मन और हृदय में सकारात्मकता का संचार होता है, जो तनाव और चिंता को कम करता है। नियमित रूप से इस भजन का सामर्थ्य मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने और आत्मिक शांति प्रदान करने का कार्य करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। बत्ती जलाकर और भगवान के चित्र या मूर्ति के सामने ध्यान मुद्रा में बैठना चाहिए। मन को एकाग्र करके भजन का जाप करें, लाभ स्वरूप शांति और ध्यान की प्राप्ति होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का उद्देश्य क्या है?

इस भजन का उद्देश्य भगवान की अद्भुतता का वर्णन करना और भक्तों को उनकी लीलाओं में ध्यान लगाने के लिए प्रेरित करना है।

क्या कबीर दास जी का संदेश सार्वभौम है?

हाँ, कबीर दास जी का संदेश सभी धर्मों के लिए सार्वभौम है और यह सभी को एकता और भक्ति का पाठ पढ़ाता है।

इस भजन के लाभ क्या हैं?

इस भजन के लाभ में मानसिक शांति, आंतरिक संतोष, और आत्मिक जागरूकता शामिल हैं, जो जीवन में उत्साह और प्रेरणा का संचार करते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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