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Durga Bhajan Lyrics

Arj Karo Manjur Lyrics (Durga Bhajan) – अर्ज करो मंजूर, सच्चियाँ ज्योतां वाली

248 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

🙏 अर्ज करो मंजूर – सच्चियाँ ज्योतां वाली

(Arj Karo Manjur – Sachiyan Jyotan Wali) – Durga Bhajan 2026

ॐ श्री दुर्गायै नमः ॥ जय माता दी ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: दुर्गा भजन / माता भजन
📍 विशेष: झंडियां वाली माँ / सच्चियाँ ज्योतां वाली

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी-पंजाबी मिश्रित)

॥ स्थायी ॥

माँ मेरी झंडियां वाली अर्ज करो मंजूर,
ऑगन बथेरे ने मइयाँ कोई गुण ना ही,
दर डिग्रियां दी ही फड़ लै तू बांह,
बकश दे मेरे कसूर माँ मेरी झंडिया वाली अर्ज करो मंजूर..

॥ अंतरा १ ॥

ना पूजा ना पाठ समधि जन्म जन्म दा मैया मैं अपराधी,
बक्श दे मेरे कसूर माँ मेरी झंडियां वाली,
अर्ज करो मंजूर...

॥ अंतरा २ ॥

दुःख बथेरे ने मइयाँ कहे नहीं जांदे,
इस जिंदड़ी दे उते सहे नहीं जाने,
करदे दिला दे दुःख दूर माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...

॥ अंतरा ३ ॥

दुखा वेले झंडिया ने जदो याद मावा,
मावा बिना कौन पूछे दिला दियां हावा,
करदे दिला दे दुःख दूर माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...

॥ अंतरा ४ ॥

छम छम अखियां चो नीर पेया आंदा,
लाल निमाना दादी तरले पांदा,
भवन ते भुलाना जर्रूर, माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...

॥ अंतरा ५ ॥

चारो पासे छाया नि माइयाँ धोर अँधेरा,
इस दुनिया विच कोई न मेरा,
तू माँ मेरी मैं बछड़ा तेरा, माँ मेरी झण्डियावली,
अर्ज करो मंजूर...

॥ जय माता दी ॥ शेरां वाली माँ ॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन माँ दुर्गा के "झंडियां वाली" स्वरूप से गहरी विनती और समर्पण को दर्शाता है। "माँ मेरी झंडियां वाली अर्ज करो मंजूर" – भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वे उसकी अर्ज (प्रार्थना) को स्वीकार करें।

भक्त स्वीकार करता है कि उसके आँगन में बहुत कुछ है, लेकिन उसमें कोई गुण नहीं है। वह माँ से हाथ पकड़कर अपने कसूर माफ करने की प्रार्थना करता है। वह कहता है कि न तो उसने पूजा की, न पाठ किया, जन्म-जन्म से वह अपराधी है।

दुःख इतने अधिक हैं कि कहे नहीं जाते, इस जिंदगी पर सहे नहीं जाते। वह माँ से प्रार्थना करता है कि वे दिल के दुःख दूर करें। दुख के समय जब झंडियाँ (माँ के दरबार के प्रतीक) याद आती हैं, तो माँ के बिना कौन दिल की हालत पूछता है?

आँखों से छम-छम आँसू बह रहे हैं। भक्त कहता है कि चारों ओर धोर अँधेरा (गहरा अंधकार) छाया है, इस दुनिया में उसका कोई नहीं। अंत में वह पुकारता है – "तू माँ मेरी मैं बछड़ा तेरा" – तू मेरी माँ है और मैं तेरा बच्चा हूँ।

यह भजन हमें सिखाता है कि माँ ही एकमात्र सहारा हैं जब सारी दुनिया साथ छोड़ देती है। चाहे हम कितने भी अपराधी हों, माँ अपने बच्चे के कसूर माफ कर देती है और उसके दुःख दूर कर देती है।

🚩 झंडियां वाली माँ – स्वरूप और महत्व

झंडियां वाली माँ: यह माँ दुर्गा का एक विशेष स्वरूप है, विशेषकर उत्तर भारत और पंजाब क्षेत्र में लोकप्रिय। माँ के मंदिरों में भक्त झंडे (निशान) चढ़ाते हैं, इसलिए उन्हें "झंडियां वाली माँ" कहा जाता है।

सच्चियाँ ज्योतां वाली: "सच्ची ज्योत" का अर्थ है सच्चा प्रकाश या सत्य की ज्योति। माँ को सच्ची ज्योत वाली कहकर यह दर्शाया गया है कि वे सत्य के प्रकाश से भक्त के अंधकार को दूर करती हैं।

भक्ति भाव: यह भजन पंजाबी और हिन्दी के मिश्रण में लिखा गया है जो इस क्षेत्र की लोकभाषा को दर्शाता है। "अर्ज करो मंजूर" का भाव है कि भक्त माँ के सामने अपनी विनती रखता है और उसे स्वीकार करने की प्रार्थना करता है।

बछड़ा और माँ का रिश्ता: "तू माँ मेरी मैं बछड़ा तेरा" – यह पंक्ति माँ-बेटे के अटूट रिश्ते को दर्शाती है। बछड़ा (बच्चा) चाहे कितना भी अपराधी हो, माँ उसे कभी नहीं त्यागती।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🙏 अपराधी का पश्चाताप

"ना पूजा ना पाठ, जन्म जन्म दा मैया मैं अपराधी" – भक्त अपनी कमियों को स्वीकार करता है और माँ से क्षमा याचना करता है। यह विनम्रता और पश्चाताप का भाव है।

💧 आँसुओं की भाषा

"छम छम अखियां चो नीर पेया आंदा" – आँखों से लगातार आँसू बह रहे हैं। यह भक्त की गहरी व्यथा और माँ के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

🌑 अंधकार में प्रकाश

"चारो पासे छाया नि माइयाँ धोर अँधेरा" – चारों ओर गहरा अंधकार है। भक्त माँ से प्रकाश की कामना करता है।

🐄 माँ-बछड़ा प्रतीक

"तू माँ मेरी मैं बछड़ा तेरा" – यह अद्भुत प्रतीक है। जैसे गाय अपने बछड़े की रक्षा करती है, वैसे ही माँ अपने भक्त की रक्षा करती है।

🎯 संदेश : माँ ही एकमात्र सच्चा सहारा है। चाहे हम कितने भी अपराधी हों, चाहे हमने कभी पूजा-पाठ न किया हो, माँ अपने बच्चे की पुकार सुनती है। उसके सच्चे ज्योत (प्रकाश) से जीवन का अंधकार दूर होता है। वह झंडियां वाली माँ अपने भक्त की हर अर्ज मंजूर करती है। जय माता दी!

ॐ श्री दुर्गायै नमः ॥ इति दुर्गाभजनम् ॥
॥ जय माता दी जय माता दी जय जय माता दी ॥

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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