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जहाँ नाथ रख दोगे, वहीं मैं रहूँगा (शरणागति भजन) लिरिक्स | Jahan Nath Rakh Doge Wahi Main Rahunga Sharnagati Bhajan Lyrics

316 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 जहाँ नाथ रख दोगे, वहीं मैं रहूँगा

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Jahan Nath Rakh Doge, Wahi Main Rahunga) – शरणागति भजन / पूर्ण समर्पण गीत

आत्मसमर्पण – प्रभु की इच्छा पर पूर्ण विश्वास

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: शरणागति भजन / आत्मसमर्पण गीत
🎶 भाव: समर्पण, विश्वास, निःस्वार्थ भक्ति
📍 विशेषता: पूर्ण रूप से प्रभु के प्रति समर्पण और उनकी इच्छा पर भरोसा
📀 प्रचलन: सच्चे साधकों, शरणागत भक्तों और गुरु-शिष्य परम्परा में अत्यंत प्रिय भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

जहाँ नाथ रख दोगे, वहीं मैं रहूँगा,
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा।
ये जीवन समर्पित, शरण में तुम्हारे,
तुम ही मेरे सर्वस्व, तुम ही प्राण प्यारे।
तुम्हें छोड़ कर नाथ, मैं किससे कहूँगा,
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा।

॥ अंतरा १ ॥

प्रभु ना कोई उलझन, ना कोई अर्ज़ी,
कर लो, करा लो, तुम्हारी जो मर्ज़ी।
कहना भी होगा तो, तुम्हीं से कहूँगा,
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा।

॥ अंतरा २ ॥

तुम्हारे ही दिन हैं, तुम्हारी ही रातें,
कृपानाथ, सब कुछ है तुम्हारी कृपा से।
सहाओगे नाथ जो भी, उसी से सहूँगा,
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा।

॥ अंतरा ३ ॥

दया नाथ, दयनीय है मेरी अवस्था,
तुम्हारे ही हाथ मेरी है सारी व्यवस्था।
नारायण प्रभु प्रेम, मैं पावन कहूँगा,
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा।
जहाँ नाथ रख दोगे, वहीं मैं रहूँगा,
जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा।

✍️ रचनाकार :- परम्परागत / लोक भक्ति (शरणागति रस)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत भावपूर्ण शरणागति भजन भक्त के पूर्ण समर्पण और प्रभु की इच्छा पर अटूट विश्वास को दर्शाता है। “जहाँ नाथ रख दोगे, वहीं मैं रहूँगा, जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा” – भक्त प्रभु से कहता है कि मैं तेरी इच्छा के बिना कुछ नहीं हूँ; तू जहाँ रखेगा, वहाँ रहूँगा, जिधर ले जाएगा, उधर चलूँगा। यह पूर्ण समर्पण की पराकाष्ठा है।

“ये जीवन समर्पित, शरण में तुम्हारे, तुम ही मेरे सर्वस्व, तुम ही प्राण प्यारे” – भक्त ने अपना जीवन प्रभु की शरण में अर्पित कर दिया है। प्रभु ही उसके सब कुछ हैं – धन, प्राण, सब।

पहले अंतरे में वह कहता है – “प्रभु ना कोई उलझन, ना कोई अर्ज़ी, कर लो, करा लो, तुम्हारी जो मर्ज़ी” – उसे कोई अपनी अलग उलझन या प्रार्थना नहीं है; जो प्रभु की मर्जी, वही उसके लिए स्वीकार्य है। यह “तव मर्ज़ी” का पूर्ण स्वीकार है, जैसे इस्लाम के “इंशाअल्लाह” या हिंदू धर्म में “तेरी इच्छा” का भाव।

दूसरे अंतरे में – “तुम्हारे ही दिन हैं, तुम्हारी ही रातें” – सब कुछ प्रभु का है। वह जो भी सहाएगा, भक्त वही सहेगा। तीसरे अंतरे में वह अपनी दयनीय स्थिति स्वीकार करता है और पूरी व्यवस्था प्रभु के हाथों सौंप देता है।

यह भजन उन सभी के लिए प्रेरणादायक है जो सच्चे मन से प्रभु के प्रति आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। यह गीत श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक “यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्” (जो कुछ तू करता है, जो कुछ खाता है, जो कुछ दान करता है – वह सब मुझे अर्पित कर दे) के भाव को सहज भाषा में प्रस्तुत करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

पूर्ण शरणागति का भाव: इस भजन की हर पंक्ति “तेरी इच्छा, मेरी स्वीकृति” की भावना से ओतप्रोत है। भक्त कुछ माँग नहीं रहा, न कोई शिकायत, बस प्रभु की इच्छा पर संतोष। यह शरणागति का उच्चतम स्तर है।

सुख-दुःख में समान भाव: “जहाँ रख दोगे, वहीं रहूँगा” का अर्थ है – सुख में भी, दुःख में भी, संपन्नता में भी, अभाव में भी – भक्त प्रभु को धन्यवाद देता है।

आध्यात्मिक परिपक्वता: यह भजन केवल गीत नहीं, एक जीवन दर्शन है। जो भक्त इसे अपने जीवन में उतार लेता है, वह कभी दुखी नहीं होता, क्योंकि उसने सब कुछ प्रभु पर छोड़ दिया है।

💖 आत्मसमर्पण का संगम

🎯 संदेश

जब भक्त सचमुच प्रभु के हाथों में अपनी बागडोर सौंप देता है, तो उसे किसी भी बात की चिंता नहीं रहती। वह जानता है कि प्रभु की इच्छा ही सर्वश्रेष्ठ है। यही सच्ची शरणागति है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो जीवन की चुनौतियों से परेशान हैं। यह उन्हें याद दिलाता है कि सब कुछ प्रभु के हाथ में है, और उनकी इच्छा पर भरोसा रखना ही सबसे बड़ी ताकत है।

🙏 ॐ नमो नारायणाय ।। शरणागति ही सबसे बड़ी उपलब्धि है ।। जय श्री राम ।।

॥ इति शरणागति भजनम् ॥
॥ जहाँ नाथ रख दोगे, वहीं मैं रहूँगा, जहाँ ले चलोगे, वहीं मैं चलूँगा ॥
श्रेणियां: hari bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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