मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् । अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ॥ १०॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदअनेक
अनेक
वक्त्र
मुख
नयनम्
नेत्रों वाला
अनेक
अनेक
अद्भुत
अद्भुत
दर्शनम्
दर्शन वाला
अनेक
अनेक
दिव्य
दिव्य
आभरणम्
आभूषणों वाला
दिव्य
दिव्य
अनेक
अनेक
उद्यत
उठाए हुए
आयुधम्
शस्त्रों वाला।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
उस विराट रूप के अनेक मुख और नेत्र थे, अनेक अद्भुत दृश्य थे, अनेक दिव्य आभूषण थे और अनेक दिव्य शस्त्र उठे हुए थे।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन द्वारा देखे गए विराट रूप का वर्णन प्रारंभ होता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
उस विराट रूप के अनेक मुख और नेत्र थे, अनेक अद्भुत दृश्य थे, अनेक दिव्य आभूषण थे और अनेक दिव्य शस्त्र उठे हुए थे।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् का स्वरूप अनंत गुणों और शक्तियों से परिपूर्ण है।