मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सञ्जय उवाच । एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः । दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥ ९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदसञ्जय
संजय
उवाच
बोले
एवम्
इस प्रकार
उक्त्वा
कहकर
ततः
तब
राजन्
हे राजन्
महायोगेश्वर
महायोगेश्वर
हरिः
हरि (कृष्ण)
दर्शयामास
दिखाया
पार्थाय
अर्जुन को
परमम्
परम
रूपम्
रूप
ऐश्वरम्
ऐश्वर्यमय।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
संजय बोले: हे राजन्, इस प्रकार कहकर तब महायोगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाया।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि कैसे भगवान् ने अर्जुन को विराट रूप दिखाया।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे राजन्, इस प्रकार कहकर तब महायोगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाया।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह घटना भगवान् की कृपा और उनकी दिव्य लीला का प्रत्यक्ष प्रमाण है।