मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता । यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः ॥ १२॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पददिवि
आकाश में
सूर्यसहस्रस्य
हजारों सूर्यों की
भवेत्
हो
युगपत्
एक साथ
उत्थिता
उठी हुई
यदि
यदि
भाः
प्रभा
सदृशी
समान
सा
वह
स्यात्
हो
भासः
प्रभा के
तस्य
उस
महात्मनः
महात्मा (विराट रूप) की।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
यदि आकाश में हजारों सूर्य एक साथ उदय हो जाएँ, तो उनकी प्रभा कहीं उस महात्मा (विराट रूप) की प्रभा के समान हो सकती है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
विराट रूप की अद्वितीय चमक का वर्णन।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
यदि आकाश में हजारों सूर्य एक साथ उदय हो जाएँ, तो उनकी प्रभा कहीं उस महात्मा (विराट रूप) की प्रभा के समान हो सकती है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् का तेज अपरंपार और अद्वितीय है।