श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 12

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 131 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता । यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः ॥ १२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
दिवि
आकाश में
सूर्यसहस्रस्य
हजारों सूर्यों की
भवेत्
हो
युगपत्
एक साथ
उत्थिता
उठी हुई
यदि
यदि
भाः
प्रभा
सदृशी
समान
सा
वह
स्यात्
हो
भासः
प्रभा के
तस्य
उस
महात्मनः
महात्मा (विराट रूप) की।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

यदि आकाश में हजारों सूर्य एक साथ उदय हो जाएँ, तो उनकी प्रभा कहीं उस महात्मा (विराट रूप) की प्रभा के समान हो सकती है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

विराट रूप की अद्वितीय चमक का वर्णन।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

यदि आकाश में हजारों सूर्य एक साथ उदय हो जाएँ, तो उनकी प्रभा कहीं उस महात्मा (विराट रूप) की प्रभा के समान हो सकती है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् का तेज अपरंपार और अद्वितीय है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 12 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 12/55 22% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!