श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 15

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 145 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच । पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान् । ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ॥ १५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

19 पद
अर्जुन
अर्जुन
उवाच
बोले
पश्यामि
देखता हूँ
देवान्
देवताओं को
तव
आपके
देव
हे देव
देहे
शरीर में
सर्वान्
सभी
तथा
इसी प्रकार
भूतविशेषसङ्घान्
विशिष्ट प्राणियों के समूहों को
ब्रह्माणम्
ब्रह्मा को
ईशम्
शिव को
कमलासनस्थम्
कमलासन पर स्थित
ऋषीन्
ऋषियों को
च
और
सर्वान्
सभी
उरगान्
सर्पों को
च
और
दिव्यान्
दिव्य।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अर्जुन बोले: हे देव, मैं आपके शरीर में सभी देवताओं को तथा विविध प्राणियों के समूहों को देखता हूँ; ब्रह्मा जी को कमलासन पर स्थित देखता हूँ, तथा सभी ऋषियों और दिव्य सर्पों को देखता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अर्जुन विराट रूप में दिख रहे विभिन्न प्राणियों का वर्णन करते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे देव, मैं आपके शरीर में सभी देवताओं को तथा विविध प्राणियों के समूहों को देखता हूँ; ब्रह्मा जी को कमलासन पर स्थित देखता हूँ, तथा सभी ऋषियों और दिव्य सर्पों को देखता हूँ।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् के विराट रूप में समस्त चराचर जगत का दर्शन होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 15/55 27% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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