श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 16

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 139 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं पश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम् । नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप ॥ १६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

20 पद
अनेक
अनेक
बाहु
भुजाएँ
उदर
उदर
वक्त्र
मुख
नेत्रम्
नेत्र
पश्यामि
देखता हूँ
त्वाम्
आपको
सर्वतः
सब ओर
अनन्तरूपम्
अनंत रूपों वाला
न
नहीं
अन्तम्
अंत
न
नहीं
मध्यम्
मध्य
न
नहीं
पुनः
फिर
तव
आपका
आदिम्
आदि
पश्यामि
देखता हूँ
विश्वेश्वर
हे विश्वेश्वर
विश्वरूप
हे विश्वरूप।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे विश्वेश्वर, हे विश्वरूप, मैं आपको अनेक भुजाओं, उदरों, मुखों और नेत्रों से युक्त, सब ओर अनंत रूप धारण किए हुए देखता हूँ। मैं आपका न अंत देखता हूँ, न मध्य और न ही आदि।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अर्जुन भगवान् के विराट रूप की अनंतता का वर्णन करते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे विश्वेश्वर, हे विश्वरूप, मैं आपको अनेक भुजाओं, उदरों, मुखों और नेत्रों से युक्त, सब ओर अनंत रूप धारण किए हुए देखता हूँ। मैं आपका न अंत देखता हूँ, न मध्य और न ही आदि।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् अनंत हैं, उनका न आदि है, न अंत।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 16/55 29% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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