मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च । गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥ २२॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
18 पदरुद्रादित्या
रुद्र और आदित्य
वसवः
वसु
ये
जो
च
और
साध्या
साध्य
विश्वे
विश्वेदेव
अश्विनौ
अश्विनीकुमार
मरुतः
मरुत
च
और
ऊष्मपाः
उष्मप (पितर)
च
और
गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा
गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह
वीक्षन्ते
देख रहे हैं
त्वाम्
आपको
विस्मिताः
विस्मित
च
और
एव
ही
सर्वे
सभी।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, मरुत्, उष्मप (पितर), तथा गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह – सभी आपको आश्चर्य से देख रहे हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
विभिन्न देवताओं और प्राणियों द्वारा विराट रूप के दर्शन।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, मरुत्, उष्मप (पितर), तथा गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह – सभी आपको आश्चर्य से देख रहे हैं।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् का रूप सबके लिए अद्भुत है।