श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 22

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 114 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च । गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥ २२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

18 पद
रुद्रादित्या
रुद्र और आदित्य
वसवः
वसु
ये
जो
च
और
साध्या
साध्य
विश्वे
विश्वेदेव
अश्विनौ
अश्विनीकुमार
मरुतः
मरुत
च
और
ऊष्मपाः
उष्मप (पितर)
च
और
गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा
गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह
वीक्षन्ते
देख रहे हैं
त्वाम्
आपको
विस्मिताः
विस्मित
च
और
एव
ही
सर्वे
सभी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, मरुत्, उष्मप (पितर), तथा गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह – सभी आपको आश्चर्य से देख रहे हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

विभिन्न देवताओं और प्राणियों द्वारा विराट रूप के दर्शन।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, मरुत्, उष्मप (पितर), तथा गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह – सभी आपको आश्चर्य से देख रहे हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् का रूप सबके लिए अद्भुत है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 22/55 40% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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