मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम् । बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् ॥ २३॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदरूपम्
रूप
महत्
महान्
ते
आपका
बहुवक्त्रनेत्रम्
बहुत मुख और नेत्रों वाला
महाबाहो
हे महाबाहो
बहुबाहूरुपादम्
बहुत भुजाओं, जंघाओं और पैरों वाला
बहूदरम्
बहुत उदरों वाला
बहुदंष्ट्राकरालम्
बहुत दाढ़ों से विकराल
दृष्ट्वा
देखकर
लोकाः
लोक
प्रव्यथिताः
व्याकुल
तथा
वैसे ही
अहम्
मैं।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे महाबाहो, आपके इस महान् रूप को, जिसमें अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक भुजाएँ, जंघाएँ और पैर हैं, अनेक उदर हैं, और अनेक दाढ़ों से विकराल है, देखकर सभी लोक व्याकुल हो रहे हैं और मैं भी व्याकुल हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन अपने भय को व्यक्त करते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे महाबाहो, आपके इस महान् रूप को, जिसमें अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक भुजाएँ, जंघाएँ और पैर हैं, अनेक उदर हैं, और अनेक दाढ़ों से विकराल है, देखकर सभी लोक व्याकुल हो रहे हैं और मैं भी व्याकुल हूँ।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् का विकराल रूप भय उत्पन्न करता है, लेकिन यह भक्त के लिए कल्याणकारी है।