श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 29

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः । तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः ॥ २९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

16 पद
यथा
जैसे
प्रदीप्तम्
प्रज्वलित
ज्वलनम्
अग्नि में
पतङ्गा
पतंगे
विशन्ति
प्रवेश करते हैं
नाशाय
नाश के लिए
समृद्धवेगाः
तीव्र वेग से
तथा
वैसे ही
एव
ही
नाशाय
नाश के लिए
विशन्ति
प्रवेश करते हैं
लोकाः
लोक
तव
आपके
अपि
भी
वक्त्राणि
मुखों में
समृद्धवेगाः
तीव्र वेग से।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जैसे प्रज्वलित अग्नि में पतंगे तीव्र वेग से नाश के लिए प्रवेश करते हैं, वैसे ही ये सब लोग भी तीव्र वेग से आपके मुखों में नाश के लिए प्रवेश कर रहे हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

पतंगों के अग्नि में गिरने का उदाहरण।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जैसे प्रज्वलित अग्नि में पतंगे तीव्र वेग से नाश के लिए प्रवेश करते हैं, वैसे ही ये सब लोग भी तीव्र वेग से आपके मुखों में नाश के लिए प्रवेश कर रहे हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् की संहारक शक्ति के आगे कोई नहीं ठहर सकता।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 29 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 29/55 53% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!