मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
एवमेतद्यथा त्थ त्वमात्मानं परमेश्वर । द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥ ३॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदएवम्
ऐसे
एतत्
यह
यथा
जैसे
आत्थ
आपने कहा
त्वम्
आप
आत्मानम्
अपने को
परमेश्वर
हे परमेश्वर
द्रष्टुम्
देखने की
इच्छामि
इच्छा करता हूँ
ते
आपका
रूपम्
रूप
ऐश्वरम्
दिव्य
पुरुषोत्तम
हे पुरुषोत्तम।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे परमेश्वर! आपने अपने विषय में जैसा कहा है, वह सब सत्य है; फिर भी हे पुरुषोत्तम, मैं आपके ऐश्वर्यमय रूप को देखना चाहता हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन अब प्रत्यक्ष रूप से भगवान् के विराट रूप के दर्शन की इच्छा व्यक्त करते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे परमेश्वर, आपने अपने विषय में जैसा कहा है, वह सब सत्य है; फिर भी हे पुरुषोत्तम, मैं आपके ऐश्वर्यमय रूप को देखना चाहता हूँ।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भक्त की यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि वह भगवान् के दिव्य स्वरूप का साक्षात्कार करे।