मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो । योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥ ४॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदमन्यसे
आप मानते हैं
यदि
यदि
तत्
वह
शक्यम्
संभव
मया
मेरे द्वारा
द्रष्टुम्
देखना
इति
इस प्रकार
प्रभो
हे प्रभु
योगेश्वर
हे योगेश्वर
ततः
तो
मे
मुझे
त्वम्
आप
दर्शय
दिखाइए
आत्मानम्
अपने को
अव्ययम्
अविनाशी।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे प्रभो! यदि आप यह मानते हैं कि मैं आपके इस रूप को देख सकता हूँ, तो हे योगेश्वर, आप मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप का दर्शन कीजिए।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन विनम्रतापूर्वक भगवान् से विराट रूप दिखाने का अनुरोध करते हैं, यह स्वीकार करते हुए कि यह उनकी कृपा से ही संभव है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे प्रभो, यदि आप मानते हैं कि मैं उस रूप को देख सकता हूँ, तो हे योगेश्वर, मुझे अपना अविनाशी स्वरूप दिखाइए।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् के दर्शन उनकी कृपा से ही संभव हैं, हमारे प्रयासों से नहीं। अर्जुन की विनम्रता इसका उदाहरण है।