श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 31

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 108 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद । विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥ ३१॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

19 पद
आख्याहि
बताइए
मे
मुझे
कः
कौन
भवान्
आप
उग्ररूपः
उग्र रूप वाले
नमः
नमस्कार
अस्तु
हो
ते
आपको
देववर
हे देवश्रेष्ठ
प्रसीद
प्रसन्न हों
विज्ञातुम्
जानने की
इच्छामि
इच्छा करता हूँ
भवन्तम्
आपको
आद्यम्
आदि
न
नहीं
हि
ही
प्रजानामि
जानता हूँ
तव
आपकी
प्रवृत्तिम्
प्रवृत्ति।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

आप कौन हैं, जो इस उग्र रूप में हैं, यह मुझे बताइए। हे देवश्रेष्ठ, आपको नमस्कार है, प्रसन्न हों। मैं आपको, जो आदि हैं, जानना चाहता हूँ; क्योंकि मैं आपकी प्रवृत्ति को नहीं जानता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अर्जुन भगवान् के इस रूप का रहस्य जानना चाहते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

आप कौन हैं, जो इस उग्र रूप में हैं, यह मुझे बताइए। हे देवश्रेष्ठ, आपको नमस्कार है, प्रसन्न हों। मैं आपको, जो आदि हैं, जानना चाहता हूँ; क्योंकि मैं आपकी प्रवृत्ति को नहीं जानता।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् के रहस्य को जानना ही मुक्ति का मार्ग है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 31/55 56% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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