श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 34

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान् । मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान् ॥ ३४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

21 पद
द्रोणम्
द्रोण को
च
और
भीष्मम्
भीष्म को
च
और
जयद्रथम्
जयद्रथ को
च
और
कर्णम्
कर्ण को
तथा
इसी प्रकार
अन्यान्
दूसरे
अपि
भी
योधवीरान्
योद्धा वीरों को
मया
मेरे द्वारा
हतान्
मारे गए
त्वम्
तू
जहि
मार
मा
मत
व्यथिष्ठाः
व्यथित हो
युध्यस्व
युद्ध कर
जेतासि
जीतेगा
रणे
युद्ध में
सपत्नान्
शत्रुओं को।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण तथा अन्य महारथी योद्धा मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं। तू उन्हें मार, व्यथित मत हो। युद्ध कर, तू युद्ध में शत्रुओं को जीत लेगा।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान् विशिष्ट योद्धाओं के नाम लेकर अर्जुन को आश्वस्त करते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण तथा अन्य महारथी योद्धा मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं। तू उन्हें मार, व्यथित मत हो। युद्ध कर, तू युद्ध में शत्रुओं को जीत लेगा।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् की योजना के आगे मनुष्य की चिंता व्यर्थ है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 34/55 62% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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