मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च । नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥ ३९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
21 पदवायुः
वायु
यमः
यम
अग्निः
अग्नि
वरुणः
वरुण
शशाङ्कः
चंद्रमा
प्रजापतिः
प्रजापति
त्वम्
आप
प्रपितामहः
परदादा (ब्रह्मा के भी पिता)
च
और
नमः
नमस्कार
नमः
नमस्कार
ते
आपको
अस्तु
हो
सहस्रकृत्वः
हजारों बार
पुनः
फिर
च
और
भूयः
फिर
अपि
भी
नमः
नमस्कार
नमः
नमस्कार
ते
आपको।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
आप वायु, यम, अग्नि, वरुण, चंद्रमा, प्रजापति और प्रपितामह (ब्रह्मा के भी पिता) हैं। आपको हजारों बार नमस्कार है, बार-बार नमस्कार है, नमस्कार है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन भगवान् को विभिन्न देवताओं के रूप में पहचानते हैं और बार-बार नमस्कार करते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
आप वायु, यम, अग्नि, वरुण, चंद्रमा, प्रजापति और प्रपितामह (ब्रह्मा के भी पिता) हैं। आपको हजारों बार नमस्कार है, बार-बार नमस्कार है, नमस्कार है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् ही सभी देवताओं के रूप में प्रकट हैं।