मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व । अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥ ४०॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
19 पदनमः
नमस्कार
पुरस्तात्
सामने से
अथ
और
पृष्ठतः
पीछे से
ते
आपको
नमः
नमस्कार
अस्तु
हो
ते
आपको
सर्वतः
सब ओर से
एव
ही
सर्व
हे सर्व (सब कुछ)
अनन्तवीर्य
अनंत पराक्रम वाले
अमितविक्रम
अपरिमित पराक्रम वाले
त्वम्
आप
सर्वम्
सब कुछ
समाप्नोषि
व्याप्त करते हैं
ततः
इसलिए
असि
हैं
सर्वः
सर्व (सब कुछ)।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
आपको सामने से नमस्कार, पीछे से नमस्कार, हे सर्व, आपको सब ओर से नमस्कार है। हे अनन्तवीर्य, हे अमितविक्रम, आप सब कुछ व्याप्त करते हैं, इसलिए आप ही सर्व कुछ हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन भगवान् को सर्वव्यापी मानते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
आपको सामने से नमस्कार, पीछे से नमस्कार, हे सर्व, आपको सब ओर से नमस्कार है। हे अनन्तवीर्य, हे अमितविक्रम, आप सब कुछ व्याप्त करते हैं, इसलिए आप ही सर्व कुछ हैं।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् सर्वव्यापी हैं, अतः उन्हें सब ओर से नमस्कार करना चाहिए।