श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 40

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 128 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व । अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥ ४०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

19 पद
नमः
नमस्कार
पुरस्तात्
सामने से
अथ
और
पृष्ठतः
पीछे से
ते
आपको
नमः
नमस्कार
अस्तु
हो
ते
आपको
सर्वतः
सब ओर से
एव
ही
सर्व
हे सर्व (सब कुछ)
अनन्तवीर्य
अनंत पराक्रम वाले
अमितविक्रम
अपरिमित पराक्रम वाले
त्वम्
आप
सर्वम्
सब कुछ
समाप्नोषि
व्याप्त करते हैं
ततः
इसलिए
असि
हैं
सर्वः
सर्व (सब कुछ)।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

आपको सामने से नमस्कार, पीछे से नमस्कार, हे सर्व, आपको सब ओर से नमस्कार है। हे अनन्तवीर्य, हे अमितविक्रम, आप सब कुछ व्याप्त करते हैं, इसलिए आप ही सर्व कुछ हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अर्जुन भगवान् को सर्वव्यापी मानते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

आपको सामने से नमस्कार, पीछे से नमस्कार, हे सर्व, आपको सब ओर से नमस्कार है। हे अनन्तवीर्य, हे अमितविक्रम, आप सब कुछ व्याप्त करते हैं, इसलिए आप ही सर्व कुछ हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् सर्वव्यापी हैं, अतः उन्हें सब ओर से नमस्कार करना चाहिए।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 40/55 73% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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