मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच । दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन । इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः ॥ ५१॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदअर्जुन
अर्जुन
उवाच
बोले
दृष्ट्वा
देखकर
इदम्
इस
मानुषम्
मनुष्य
रूपम्
रूप
तव
आपका
सौम्यम्
सौम्य
जनार्दन
हे जनार्दन
इदानीम्
अब
अस्मि
हूँ
संवृत्तः
हुआ
सचेताः
सचेत
प्रकृतिम्
स्वभाव को
गतः
प्राप्त।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अर्जुन बोले: हे जनार्दन, आपके इस सौम्य मानव रूप को देखकर मैं अब सचेत हुआ और अपने स्वाभाविक अवस्था में आ गया हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन चतुर्भुज या मानव रूप देखकर शांत हुए।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे जनार्दन, आपके इस सौम्य मानव रूप को देखकर मैं अब सचेत हुआ और अपने स्वाभाविक अवस्था में आ गया हूँ।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् के सगुण रूप के दर्शन से भक्त को मानसिक शांति मिलती है।