श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 6

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 129 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा । बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥ ६॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
पश्य
देख
आदित्यान्
आदित्यों को
वसून्
वसुओं को
रुद्रान्
रुद्रों को
अश्विनौ
अश्विनीकुमारों को
मरुतः
मरुतों को
तथा
भी
बहूनि
अनेक
अदृष्टपूर्वाणि
पहले न देखे हुए
पश्य
देख
आश्चर्याणि
आश्चर्यों को
भारत
हे भारत।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भारत, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों और मरुतों को देख; तथा बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यों को भी देख।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान् अर्जुन को विराट रूप में स्थित विभिन्न देवताओं के दर्शन का आश्वासन देते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे भारत, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों और मरुतों को देख; तथा बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यों को भी देख।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् के विराट स्वरूप में समस्त देवतागण और सृष्टि के सभी तत्व समाहित हैं।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 6/55 11% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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