मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा । बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥ ६॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदपश्य
देख
आदित्यान्
आदित्यों को
वसून्
वसुओं को
रुद्रान्
रुद्रों को
अश्विनौ
अश्विनीकुमारों को
मरुतः
मरुतों को
तथा
भी
बहूनि
अनेक
अदृष्टपूर्वाणि
पहले न देखे हुए
पश्य
देख
आश्चर्याणि
आश्चर्यों को
भारत
हे भारत।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे भारत, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों और मरुतों को देख; तथा बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यों को भी देख।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान् अर्जुन को विराट रूप में स्थित विभिन्न देवताओं के दर्शन का आश्वासन देते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे भारत, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों और मरुतों को देख; तथा बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यों को भी देख।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् के विराट स्वरूप में समस्त देवतागण और सृष्टि के सभी तत्व समाहित हैं।