श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 11 (विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga))

अध्याय 11 · श्लोक 7

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 55 2 मिनट का पठन 138 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् । मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि ॥ ७॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
इह
यहाँ
एकस्थम्
एक ही स्थान पर स्थित
जगत्
जगत्
कृत्स्नम्
सम्पूर्ण
पश्य
देख
अद्य
अब
सचराचरम्
चर और अचर सहित
मम
मेरे
देहे
शरीर में
गुडाकेश
हे गुडाकेश
यत्
जो
च
और
अन्यत्
अन्य
द्रष्टुम्
देखना
इच्छसि
तुम चाहते हो।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे गुडाकेश, अब तू मेरे इस शरीर में सम्पूर्ण चर-अचर सहित समस्त जगत् को एक साथ देख तथा और भी जो कुछ तू देखना चाहता है, उसे देख।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान् अर्जुन को अपने शरीर में सम्पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन का वचन देते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे गुडाकेश, अब तू मेरे इस शरीर में सम्पूर्ण चर-अचर सहित समस्त जगत् को एक साथ देख तथा और भी जो कुछ तू देखना चाहता है, उसे देख।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान् का विराट स्वरूप समस्त सृष्टि का आधार है और उसमें सब कुछ समाया हुआ है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga)
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श्लोक 7/55 13% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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