मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् । मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि ॥ ७॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदइह
यहाँ
एकस्थम्
एक ही स्थान पर स्थित
जगत्
जगत्
कृत्स्नम्
सम्पूर्ण
पश्य
देख
अद्य
अब
सचराचरम्
चर और अचर सहित
मम
मेरे
देहे
शरीर में
गुडाकेश
हे गुडाकेश
यत्
जो
च
और
अन्यत्
अन्य
द्रष्टुम्
देखना
इच्छसि
तुम चाहते हो।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे गुडाकेश, अब तू मेरे इस शरीर में सम्पूर्ण चर-अचर सहित समस्त जगत् को एक साथ देख तथा और भी जो कुछ तू देखना चाहता है, उसे देख।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान् अर्जुन को अपने शरीर में सम्पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन का वचन देते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
हे गुडाकेश, अब तू मेरे इस शरीर में सम्पूर्ण चर-अचर सहित समस्त जगत् को एक साथ देख तथा और भी जो कुछ तू देखना चाहता है, उसे देख।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भगवान् का विराट स्वरूप समस्त सृष्टि का आधार है और उसमें सब कुछ समाया हुआ है।