श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 12 (भक्ति योग (Bhakti Yoga))

अध्याय 12 · श्लोक 2

भक्ति योग (Bhakti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 118 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रीभगवानुवाच मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते । श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः ॥ २॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

16 पद
श्रीभगवान्
the Supreme Lord
उवाच
said
मयि
in Me
आवेश्य
fixing
मनः
mind
ये
who
माम्
Me
नित्य-युक्ता
ever united
उपासते
worship
श्रद्धया
with faith
परया
supreme
उपेताः
endowed
ते
they
मे
by Me
युक्ततमा
most perfect in yoga
मताः
considered.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

श्रीभगवान् ने कहा: जो मन को मुझमें लगाकर, नित्य युक्त होकर, परम श्रद्धा सहित मेरी उपासना करते हैं, वे मेरी दृष्टि में योगियों में सबसे श्रेष्ठ हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान कृष्ण स्पष्ट करते हैं कि सगुण भक्ति मार्ग श्रेष्ठ है क्योंकि यह सरल और प्रेममय है। श्रद्धा और निष्ठा से मुझमें मन लगाने वाले भक्त सबसे उत्तम योगी हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहते हैं कि जो मुझमें मन लगाकर, निरंतर मेरे साथ एकीभाव से युक्त होकर, परम श्रद्धा के साथ मेरी उपासना करते हैं, वे मेरी दृष्टि में सबसे उत्तम योगी हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भक्ति का मार्ग सबसे सरल और सीधा है। ईश्वर पर दृढ़ श्रद्धा और प्रेम ही साधना का सार है। ऐसा भक्त ईश्वर को सबसे प्रिय होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 12: भक्ति योग (Bhakti Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 2 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 2/20 10% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!