श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 12 (भक्ति योग (Bhakti Yoga))

अध्याय 12 · श्लोक 3

भक्ति योग (Bhakti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 113 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ये त्वक्षरमनिर्देश्यमव्यक्तं पर्युपासते । सर्वत्रगमचिन्त्यञ्च कूटस्थमचलन्ध्रुवम् ॥ ३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
ये
who
तु
but
अक्षरम्
the imperishable
अनिर्देश्यम्
indefinable
अव्यक्तम्
unmanifest
पर्युपासते
worship
सर्वत्र-गम्
all-pervading
अचिन्त्यम्
unthinkable
च
and
कूटस्थम्
changeless
अचलम्
immovable
ध्रुवम्
eternal.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

परन्तु जो अक्षर (अविनाशी), अनिर्देश्य (अकथनीय), अव्यक्त (अप्रकट), सर्वव्यापी, अचिन्त्य, कूटस्थ (निर्विकार), अचल और ध्रुव (शाश्वत) की उपासना करते हैं,

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

इस श्लोक में भगवान उन साधकों का वर्णन करते हैं जो निर्गुण ब्रह्म की उपासना करते हैं - जो अविनाशी, अकथनीय, अव्यक्त, सर्वव्यापी, अचिन्त्य, निर्विकार, अचल और शाश्वत है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

इस श्लोक में भगवान उन साधकों की विशेषताएँ बता रहे हैं जो सगुण साकार रूप की नहीं, बल्कि निर्गुण, अव्यक्त ब्रह्म की उपासना करते हैं। वह ब्रह्म अविनाशी, अकथनीय, अव्यक्त, सर्वव्यापी, अचिन्त्य, निर्विकार, अचल और शाश्वत है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ईश्वर का निर्गुण स्वरूप भी सत्य है, पर उसकी उपासना अधिक कठिन है क्योंकि मन को किसी आकार या गुण का सहारा नहीं मिलता। यह ज्ञानयोग या ध्यानयोग का मार्ग है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 12: भक्ति योग (Bhakti Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 3 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 3/20 15% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!