मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिता: | कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिता: || ११||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
9 पदचिन्ताम्
चिन्ता को
अपरिमेयाम्
असीम
च
और
प्रलयान्ताम्
मृत्यु पर्यन्त
उपाश्रिता
आश्रित
कामोपभोगपरमा
भोग ही परम लक्ष्य
एतावत्
इतना ही
इति
ऐसा
निश्चिता
निश्चय करने वाले।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
वे मृत्यु पर्यन्त रहने वाली असीम चिन्ता का आश्रय लिए रहते हैं, काम-भोग को ही परम मानते हैं और "बस यही सब कुछ है" – ऐसा निश्चय कर लेते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
आसुरी लोग भोग को ही जीवन का परम लक्ष्य मानते हैं। वे सांसारिक चिन्ताओं में डूबे रहते हैं और मृत्यु तक उनका कोई अन्त नहीं होता।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
वे मृत्यु तक रहने वाली असीम चिन्ता का आश्रय लेते हैं, काम-भोग को ही परम मानते हैं और यह निश्चय कर लेते हैं कि बस यही सब कुछ है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
भोगवादी दृष्टिकोण चिन्ता और अशान्ति का कारण बनता है। वास्तविक सुख आत्मिक उन्नति में है।