मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आशापाशशतैर्बद्धा: कामक्रोधपरायणा: | ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् || १२||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
7 पदआशापाशशतै
आशा रूपी सैंकड़ों फन्दों से
बद्धा
बंधे हुए
कामक्रोधपरायणा
काम और क्रोध में तत्पर
ईहन्ते
इच्छा करते हैं
कामभोगार्थम्
भोगों के लिए
अन्यायेन
अन्यायपूर्वक
अर्थसञ्चयान्
धन के संचय की।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
आशा रूपी सैंकड़ों फन्दों से बंधे हुए, काम-क्रोध में लगे हुए, वे भोगों के लिए अन्यायपूर्वक धन का संचय करना चाहते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
आसुरी लोग आशाओं के जाल में फँसे रहते हैं। काम और क्रोध उन्हें प्रेरित करते हैं। वे अन्यायपूर्वक धन इकट्ठा करने में लगे रहते हैं।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
आशा रूपी सैंकड़ों फन्दों में बंधे हुए, काम और क्रोध में तत्पर, वे भोगों के लिए अन्यायपूर्वक धन का संचय करने की इच्छा करते हैं।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
अन्याय से धन कमाना और आशाओं में बँधे रहना मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है। धर्म से अर्जित धन ही सुखदायी होता है।