मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् | इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् || १३||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदइदम्
यह
अद्य
आज
मया
मेरे द्वारा
लब्धम्
प्राप्त किया
इमम्
यह
प्राप्स्ये
प्राप्त करूँगा
मनोरथम्
मनोरथ
इदम्
यह
अस्ति
है
इदम्
यह
अपि
भी
मे
मेरा
भविष्यति
होगा
पुन
फिर
धनम्
धन।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
मैंने आज यह प्राप्त कर लिया, अब उस मनोरथ को प्राप्त करूँगा। यह धन मेरे पास है, और यह भी मुझे भविष्य में मिलेगा।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक आसुरी व्यक्ति की सोच को दर्शाता है। वह सोचता है कि उसने आज यह पाया, कल वह पाएगा। वह अपने वर्तमान और भविष्य के धन पर अहंकार करता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
आसुरी व्यक्ति सोचता है: "मैंने आज यह प्राप्त कर लिया, अब उस मनोरथ को प्राप्त करूँगा। यह धन मेरे पास है, और यह भी भविष्य में मेरा होगा।"
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह अहंकार और ममता का सूचक है। वास्तविक सुख तो ईश्वर में समर्पण से मिलता है, न कि संग्रह से।