श्रीभगवानुवाच | अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थिति: | दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् || १||
श्रीभगवान् बोले: निर्भयता, अन्त:करण की शुद्धि, ज्ञानयोग में स्थिति, दान, इन्द्रिय-दमन, यज्ञ, स्वाध्याय, तप और सरलता — ये सब दैवी सम्पदा के लक्षण हैं।